आईए - चाँद पे चलें | चंद्रयान 3

चंद्रयान 3 



पूरा देश जिसे हम एकजुट होकर भारत कहते हैं, आज बहुत प्रसन्न है और उससे भी ज्यादा, गर्व भी महसूस कर रहा है, क्योंकि विज्ञान के क्षेत्र में हमने फिर से एक बड़ी पारी खेली है - चंद्रयान 3। यह उपलब्धि सामान्य नहीं है, क्योंकि 40 दिन बाद जब हमारे शक्तिशाली चंद्रयान तीन की सॉफ्ट लैंडिंग सफलतापूर्वक चाँद पर हो जाएगी तब हमारा देश ना केवल उन देशों के समूह में आ जाएगा जो यह पराक्रम दिखा चुके हैं, बल्कि चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पे यह कौशल दिखने वाले दुनिया का पहला देश बन जाएगा। 

पर हमारे शौर्य की कहानी अलग है जनाब। जब कच्चा माल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो तो कारीगर काम को अंजाम दे ही देता है। चुनौती तो तब है जब यही बात न्यूनतम खर्च में हो जाए। अपने कार्यकाल में इसरो ने इन्हीं चुनौतियों को लगातार जीत कर अपने शौर्य और किफायत का लोहा हमेशा मनवाया है। उसी मेहनतकश इसरो के कर्मनिष्ठ सिपाही हैं - हमारे दिलों में घर बना चुकें- डॉक्टर के. सिवन। सर, आज जब चंद्रयान तीन अपनी सफल यात्रा में निकला है आपकी प्राथमिकता यही कह रही होगी की सॉफ्ट लैन्डिंग सफलतापूर्वक हो जाए। पर हमारी प्रार्थना है की हे प्रभु, आपके चेहरे पर जीत की मुस्कुराहट लाये, निश्चित ही लाए। 


हमें आज भी वह झुका हुआ, भावुक चेहरा याद है जो प्रधानमंत्री मोदी जी के कंधे पर अपने आंसू रोक नहीं पाया। जीत का जश्न हो तो हर व्यक्ति उसे मनाता है। पर हार की, असफलता की जिम्मेदारी लेना, यह किसी-किसी के ही बस की बात होती है। 

उस रात को पूरा भारत अपने टीवी के सामने सभी घरवालों के साथ बैठा था। सब सही चल रहा था, हमारा उत्साह भी। फिर थोड़ी देर बाद कुछ समझ नहीं आया कि यह क्या हुआ? लगा जैसे क्या बात हुई ? फिर कुछ मिनट में आपने बताया तो बात पता चला की बात नहीं बनी। मेरा मानना है कि उस रात, उस क्षण भर के लिए आप के उस चेहरे ने पूरे देश को भावुक कर दिया। सुबह उठी तो अखबारों से और न्यूज़ चैनलों से आप के बारे में जानकारी हुई। फिर तो सर जैसे आप से इश्क ही हो गया। आपका संघर्ष-आपकी उपलब्धियों, शायद ही कोई शब्द उन्हे सटीक विशेषण दे पाए। 

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुझे पीएचडी की उपाधि से आप सम्मानित करने वाले हैं, यह जानकर मेरी खुशी उस दिन कई गुना हो चुकी थी। बार-बार यह सोचकर मेरा दिल रोमांचित होता कि जिस शख्सियत को हाल ही में जाना, जिसने मेरे जेहन को बेहद गहरा प्रभावित किया, उन्हे करीब से देखने का अवसर है यह दीक्षांत समारोह। 



ऐसी सरलता - ऐसी सहजता जो मेरे मन-मस्तक में छप गई। इसरो के तत्कालीन चीफ होने के नाते आप का संबोधन प्रौद्योगिकी से भरा हुआ होना अपेक्षित ही था। पर इतने बड़े वैज्ञानिक का भाषण इतना सरल हो सकता है, यह मैंने उस दिन जाना। कैसी सरलता और मधुरता से आपने अपनी बातों की? पूरे हॉल में मौजूद हर बच्चा, माता, पिता, गुरुजन आप ने सबको सम्मोहित कर दिया। 

आज मेरे जैसा हर युवा हमारे प्रिय के. शिवन सर को गर्व से खड़ा देखना चाहते हैं। चाहते हैं की आप फिर से भावुक हो, पर खुशी से। आगे फिर लिखूंगी सर, जब आपकी वो मुस्कुराहट देख लूं, 40 दिन बाद .. 

... और वो 40 दिन भी पूरे हो गए। 

आज, 23 अगस्त 2023, यह तिथि भारत समेत पूरी पृथ्वी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गयी है जब हमारे प्रिय वैज्ञानिकों की सेना ने यह गौरव अपने नाम लिखा लिया। जानें कैसे और क्यों, पर इस बात का पूरा पूरा भरोसा था, कि मैं 40 दिन बाद एक विजय गाथा लिखूंगी, हमारे देश की, जो पहला राष्ट्र बना, इस स्वर्णिम इतिहास को रचनेवाला। जिसने चंद्रमा के दक्षिणी छोर पर सबसे पहले अपने निशान छोड़े, हमारा लाडला- विक्रम लैंडर, अपने पहियों से भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा और इसरो के निशान चंद्रमा की सतह पर उकेरता जा रहा है। जब मैं ये अपनी भावुक भावना को इस ब्लॉग के माध्यम से अपने रीडर्स के साथ साझा कर रही हूँ।



विज्ञान के बारे में या इस से जुडी जानकारियों के बारे में आम जनता भले ही पूरा शायद ना समझ पाए पर इस विराट उपलब्धि की एहमियत पूरी तरह समझती है और इस विशेष कामयाबी को अपनी निजी कामयाबी के रूप में माना है। ज्ञान और मेहनत की भट्टी में जब स्नेह और सहयोग का घी डल जाता है तब भारत जैसे देश में इस तरह के कारनामे होना सहज ही हो जाता है। आज हमारे प्रिय डॉक्टर कलाम भी बेहद खुश होंगे। 

अब हम अंतरिक्ष में और भी नए और महत्वपूर्ण खोज और अनुसंधान के लिए तैयार हो गए हैं। वाकई  हमने दुनिया को यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में भी अग्रणी है।

हमारा भारत, हमारे के. शिवन सर, हमारा चन्द्रयान।



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